‘जाना ज़रूरी है क्या’ एक खूबसूरत काव्य-संग्रह है, जो ऐश्वर्या शर्मा द्वारा रचित है। इसमें उन्होंने जीवन के प्रति कई भावों को बताया है, जिसमें प्रतीक्षा, प्रेम, इच्छा, बचपन, आन्तरिक भावना, खुद को निरर्थक पाना आदि शामिल हैं। कवयित्री के अनुसार- उतना किसी को नहीं मिलता जितने की चाह होती है, लेकिन उतना हर बार बच जाता है जितने के साथ जीवन जिया जा सके।

यह वाकई में दिल छू लेने वाली किताब है, जिसमें पाठक हर पृष्ठ की, पंक्ति की भावना को महसूस किया जा सकता है। यह पुस्तक अहसास करवा रही है उन सभी भावनाओं का जो कहीं ना कहीं हमारी ज़िन्दगी में अधूरी हैं और मन में प्रेम के प्रति ख्यालों का पुल बाँध रही हैं। उदाहरण के तौर पर देखिए —
ज़्यादा नहीं बस
इतना समय हमारे पास
ज़रूर होना चाहिए कि
हम दे सकें,
तोहफे में किताबें, किसी को।
सजा सकें,
उसके बालों में फूल।
रख सकें,
उसके ख़त संभाल कर।

इस पुस्तक में सबसे सुन्दर बात है कि यह हमें प्रेम, रिश्ते, बचपन, अधूरापन, ठहराव, सत्य, दुःख, इच्छा आदि को सहज, अद्भुत रूप में प्रस्तुत कर रही है। यह हमारे जीवन में किसी ना किसी घटना की स्मृति दिला रही है। हम महसूस कर पा रहे हैं कि एक उम्र के जीवन को जिया जा सकता है और बेचा भी जा सकता है। ये पंक्तियाँ देखिए —
एक, गुब्बारे खरीद रहा था
एक, गुब्बारे बेच रहा था
कच्ची उम्र दोनों की
लगभग बराबर सी थी
एक बचपन जी रहा था
एक बचपन बेच रहा था।
ऐश्वर्या जी की कविताओं का यह संग्रह भावनाओं में खिले पुष्पों में ऊर्जा का निवास कर रहा है। ज़रूरत है कि व्यक्ति वहाँ पहुँचे जहाँ उसका जाना ज़रूरी था, उस जीवन को जिये जहाँ की वह कल्पना कर रहा था। इसमें प्रेम के रंगों को गहराई से समझना गया है। रचनाकार ने संवेदनशीलता को समझा है, एक व्यक्ति की उस प्रतीक्षा को, जो निरन्तर चल रही है और समाप्त हो रही है। सहजता और सुन्दर भाव के साथ जीवन की उस लय को बताया गया है जहाँ वास्तविकता और काल्पनिकता दोनों ही महत्वपूर्ण है।
-गुंजन कुमावत.
जाना ज़रुरी है क्या!
ऐश्वर्या शर्मा
पृष्ठ : 124
पंक्ति प्रकाशन
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